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Saturday, 4 February 2017

Rahasyamayi Himalaya ( Audio Video ) रहस्यमयी हिमालय ( ऑडियो विडिओ )

अभी तक आपने रहस्यमयी हिमालय श्रीन्खला पढ़ा आगे की कड़ियाँ भी जल्द प्रकाशित की जायेगी |
लीजिये अब रहस्यमयी हिमालय श्रीन्खला सुनें Youtube पर

Thursday, 20 October 2016

रहस्यमयी हिमालय - 10

नौजवान साधक सच्चिदानन्द  ने गुफा में प्रवेश कर अपना स्थान ग्रहण कर लिया |
योगी बाबा ने सच्चिदानन्द को संबोंधित करते हुए कहा “ सच्चिदानन्द मैं देख रहा हूँ तुम अपने साधना में शत प्रतिशत नहीं दे रहे हो |”
“जी बाबा मैं अपना शत प्रतिशत लगाता हूँ किन्तु कुछ परेशानियों की अनुभूति मुझे हो रही है |” नौजवान साधक ने कहा
“ मैं तुम्हारी परेशानी देख रहा हूँ | साधना के समय कुछ पूर्व जन्म की स्मृतियाँ जीवित हो आती हैं और तुम विह्वल हो जाते हो |” योगी बाबा ने कहा
“ जी प्रभु जब भी मैं अपनी साधना की गहराईओं में उतरता हूँ कुछ दृश्य सजीव हो आते हैं बिलकुल नये दृश्य जिसका मेरे इस जीवन से कोई सम्बन्ध नहीं |” नौजवान साधक ने अपनी बात बताई
“ देखो जो दृश्य उत्पन्न होते हैं और तुम्हें परेशान करते हैं वे कभी पूर्वजन्म में तुम्हारे साथ घटित हो चुके हैं | तुम अपने मन के माध्यम से उन स्मृतियों को इस जन्म में भी ले  आये |” बाबा ने कहते हुए नौजवान साधक के सर को स्पर्श किया |
योगी  बाबा के स्पर्श से वह नौजवान साधक अपने पूर्वजन्म में पहुँच गया और कुछ दृश्य उसके सामने उपस्थित हुए |
उसने देखा चार पांच लोग उसे लाठी डंडा से पिट रहे हैं कुछ लोगों के हाथ में धारदार हथियार भी था | बहुत हीं बेरहमी से उसे लोग पिट रहे थे | वह मौका देख कर उठ कर भागा | लोग उसके पीछे पीछे हथियारों के साथ  |  वह बहुत हीं तेजी से भाग रहा था | भागते भागते बुरी तरह हांफ रहा था | वह थक कर चूर हो गया था | तभी भागने के क्रम में वह निचे गिर गया | पीछे से पीछा करते हुए लोग उसके पास पहुँच गयें और हथियार आदि से उस पर वार करना शुरू कर दिया |
नौजवान साधक यह दृश्य देख कर बुरी तरह चौक कर ध्यान से जागा |
बाबा उसकी तरफ देख कर मुस्करा रहे थे |
उसने बाबा से पूछा “यह क्या था ?”
बाबा ने कहा “ तुम्हारा पूर्वजन्म | जानते हो वे लोग कौन थे और  तुम्हें क्यों पिट रहे थे |”
नौजवान साधक ने कहा “ नहीं |”
वे लोग पूर्वजन्म के  तुम्हारे हीं सगे सम्बन्धी थे जमीन  के एक विवाद के कारण तुम्हें उनके क्रोध का सामना करना पड़ा और उन लोगों ने  तुम्हारी हत्या कर दी और तुम्हारे जमीन पर कब्जा कर लिया |” योगी  बाबा ने समझाते हुए कहा |
“उस पूरी भीड़ में से एक प्रमुख व्यक्ति के उपर तुम्हारी हत्या के अपराध में मुकदमा चला और फांसी हुई | शेष लोगों को जेल की सजा भी हुई |” योगी बाबा ने कहते हुए फिर से उसके सर का स्पर्श किया और वह पुन : ध्यानस्थ हुआ |
मृत्यु के बाद का सारा दृश्य उसके आँखों के सामने से गुजर गया न्यायलय का दृश्य , उन लोगों के सजा का दृश्य , फांसी का दृश्य सभी |
योगी बाबा ने उसे हिलाते हुए ध्यान से जगाया और कहा “ अभी तुम्हारे साधना की बाधा यह थी की तुम्हारा मन दोषियों पर अटका हुआ था की उनका क्या हुआ इसलिए तुम साधना में बार बार चौक जाते थे | अब तुमने ये जान लिया है इसलिए साधना के तुम्हारे मार्ग में कोई बाधा नहीं आएगी | मन जन्मों जन्मों में  जिस कारण में   अटका रहता है उन्हीं कामनाओं की पूर्ति हेतु पुनर्जन्म करवाता है | तुम्हारा कारण था अपने हत्यारों  का परिणाम जानना जो की तुमने जान लिया है | तुम्हारी बाधा समाप्त हुई |”

नौजवान साधक सच्चिदानन्द बाबा के चरणों में गिर पड़ा |

Thursday, 9 June 2016

रहस्यमयी हिमालय Secret Himalayas

हिमालय का दिव्य वातावरण ! चारो तरफ बर्फ के सफ़ेद चादर से ढके हुए विशाल  पर्वत | सभी तरफ एक सिहरन पैदा करने वाली शान्ति | पर्वतों के बिच कल कल करती हुई बहती मंदाकिनी | हरे भरे घने देवदार के वृक्षों की दिव्य सुगंध चारो तरफ |
       पर्वत में एक छोटी सी गुफा | गुफा में दस बाई पन्द्रह फीट का जगह मात्र | गुफा के अंदर छोटी छोटी शिलाओं को जोड़ कर बनाया गया चार बाई तीन का एक आसन | आसन पर कम्बल बिछा हुआ है | उस आसन पर विराजमान एक योगी | गहन ध्यानस्थ समाधि अवस्था में | योगी के सर पर काली काली जटाएं विराज रही हैं | भाल पर एक अद्भुत तेज | चेहरे पर शान्ति | आँखें बंद अंदर के किसी लोक का दीदार करती हुई |

       एक अधेड़ उम्र का व्यक्ति जो सैलानी था अपने दल से बिछड़ कर मार्ग भटक गया है | वह अंदर से आकुल व्याकुल है | भटकता हुआ गुफा के पास से निकल रहा है पता नहीं उसके मं में क्या सूझा वह गुफा के अंदर झांक बैठा | गुफा के अंदर एक ध्यानस्थ योगी को देख कर वह आश्चर्यचकित हुआ तथा मन  हीं मन उसे हिम्मत भी आई सोचा चलो कोई तो मिला | अपने अंदर हिम्मत जुटा कर वह गुफा में प्रवेश कर गया | गुफा के अंदर घुसते हीं उसे अजीब सी शान्ति ने तथा मस्ती ने घेर लिया |
       ध्यानस्थ योगी को टोकने की हिम्मत तो उसे नहीं हुई | वह चुपचाप वहीँ निचे पालथी लगा कर बैठ गया |और अपलक उस योगी को निहारने लगा | मन  हीं मन सोचने लगा मैंने अनेकों लोगों से  सुना तथा अपने धर्म ग्रन्थों में पढ़ा भी है  सिद्ध योगियों के बारे में कहीं ये भी उनमे से एक तो नहीं |  मन में तरह तरह के  ख्याल आने लगे | उसने रामायण तथा महाभारत जैसे धर्मग्रन्थों का हल्का अध्यन किया था | सोचने लगा कहीं ये रामायण काल के  महर्षि वशिष्ठ तो नहीं या राजर्षि विश्वामित्र तो नहीं | कौन है ये महापुरुष जिनके सान्निध्य मात्र से से रोम रोम में पुलकन का आभास हो रहा है | ( आज के युग में अगर महापुरुषों , सिद्धों को पहचानने में दिक्कत हो तो ये कसौटी है उनके समीप सिर्फ पहुँचने पर अद्भुत शांति और आनन्द का आभास होगा उनके शरीर से निकलने वाली दिव्य उर्जा मात्र आपको तृप्त कर देगी )
       उसका मन हिरण की तरह कुलांचे मार रहा था घंटो वह बैठा रहा | चाह कर भी वहां से जाने की इच्छा के वावजूद वह वहां से हिल न पाया जाने कौन सा आकर्षण उसे बांधे हुए था |

जारी .........................
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