Sunday, 22 November 2015

ध्यान क्या है अपने भीतर प्रवेश करना |

बाहर  के जगत से तो हम परिचित  हैं हीं | अपना स्वभाव हीं ऐसा है कि सिर्फ और सिर्फ बाहर हीं विचरण करते रहते हैं हम सभी | अस्सी प्रतिशत बाहरी जगत से हम आँख के द्वारा परिचित होते हैं | यानी अधिकाँश आकर्षण आँख के द्वारा हीं पैदा होता है | इसलिए ध्यान करने के पहले हमें आँख बंद करना होता है | तब भीतर का जगत दीखता है थोडा सा | थोडा सा इसलिए क्योंकि फिर कल्पनाएँ हावी होने लगती है खुद पर | आँख बंद हुआ नहीं की कल्पना का घोडा दौड़ना शुरू | कभी भविष्य का  ख्याली पुलाव पकाते हुए तो कभी अतित को   याद करते हुए | मन स्थिर होता हीं नहीं स्वभाव हीं इसका ऐसा है स्थिर होगा भी कैसे | तो कोई युक्ति लगानी होगी और हम कह सकते हैं यह युक्ति है ध्यान | ध्यान में मन को शरीर के भीतर भ्रमण करने का छूट दिया जाता है | 

कभी साँसों पर ध्यान केन्द्रित करना होता है तो कभी हृदय की धडकन पर | ध्यान में शरीर के भीतर हो रहे  रक्त संचरण को भी सुना जा सकता है | तो मन शरीर में हो रही संवेदनाओं के प्रति सजग होने लगता है और रहस्य खुलने लगते हैं | एक से एक कौतुक दिखते हैं बंद आँखों से शरीर के भीतर किन्तु हम तो कभी शरीर के भीतर जाते हीं नहीं सिर्फ बाहर विचरण करते रहते हैं |

       एक के बाद एक रहस्यों से पर्दा उठता जाता है शरीर के भीतर विचरण करने पर और अंतत: उसका दीदार होता है अरे भाई उसी का जो हम वास्तव में हैं परमात्मा कहें बड़े स्तर पर या आत्मा कहें छोटे स्तर पर ! 

ये  विडिओ  आपके  ध्यान लगाने  में सहयोगी होगा 

Monday, 9 November 2015

दीपावली पर धन समृधि बढ़ाने का अचूक प्रयोग

धनतेरस, नरक चतुर्दशी  , और दीपावली को आप लक्ष्मी पूजा तो करेंगे हीं | किन्तु इस बार एक छोटा सा प्रयोग और जोड़ दें अपने पूजा में | यह प्रयोग खर्चीला भी नहीं है और अत्यंत अत्यंत फलदायी है | ये मैं नहीं दावा करूँगा की आप धन्ना कुबेर हो जायेंगे या अम्बानी या बिडला बन जायेंगे | किन्तु वर्तमान स्थित में धन वृद्धि के मामले में सुधार अवश्य होगा इसमें कोई शक नहीं | यह प्रयोग अत्यंत गोपनीय है सर्वत्र इसका उल्लेख नहीं मिलेगा |
      

अप्पको करना बस यह है आप जो पूजा दीपावली को करेंगे इस बार ऐसा करें पांच सुपारी खरीद कर लायें | उसे धो कर स्वच्छ कर लें | पूजा आरम्भ करने के पहले उसे पूजा स्थल पर किसी कपडे पर रख दें | आप जो पूजा करते हैं वे करें | फिर अंत में खूब भाव से देवी  लक्ष्मी को याद करें | दो मिनट उनका ध्यान लगायें | लक्ष्मी देवी के तस्वीर को अपनी आँखें बंद कर  अपने मानस पटल पर देखने की कोशिश करें | तस्वीर नहीं भी उभरती है तो कोई बात नहीं | ध्यान लगाने के बाद लाये गये सुपारी पर रोली या चन्दन चढ़ाएं | फिर थोडा अक्षत चढ़ाएं  | पुष्प अर्पित करें | दिवाली में पूजा के लिए  लाये गये नैवेध ( मिठाई , फल आदि ) का मन हीं मन भोग अर्पित करें | फिर जल अर्पित कर देवी लक्ष्मी को मन हीं प्रार्थना करें की हे देवी ! इस बार सभी धनाढय व्यक्तियों के घर की तरह मेरे घर भी निवास करें |    
       हो गयी आपकी पूजा सम्पन्न | सुपारी को अपने पूजा स्थल पर हीं रखें | अगले वर्ष फिर से नई सुपारी खरीद पूजा करें तथा पुराने सुपारी को जल में विसर्जित कर दें |

यह पूजा कभी भी फलदायी है चाहे दिवाली हो या किसी अन्य दिन भी |