Thursday, 27 September 2018

बहुत हीं शक्तिशाली ध्यान प्रयोग |


समस्त जीवन का आधार  क्या  है  ? पृथ्वी पर जीवन का आधार क्या है ?
विज्ञान कहता है समस्त पृथ्वी पर जीवन का आधार सूर्य है | सूर्य से हीं सारी  पृथ्वी तथा अन्य  अन्य  संचालित होते हैं यह सत्य है | फिलहाल हम विज्ञान की बात को हीं मानते  हैं | अध्यात्मिक जगत भी सूर्य को अत्यधिक महता देता है किन्तु समस्त जगत के कारण में अध्यात्म ईश्वरीय सता जिसे सनातन में ब्रह्म की उपमा दी गयी है उसे मानता है | समस्त जगत का कारण  ब्रह्म है जो सर्वत्र व्याप्त है | हालाकि विज्ञान भी इसे मानता है किन्तु अभी उहापोह की स्थिति है |


समस्त जीवन का कारण  सूर्य की रश्मियाँ हैं विज्ञान के अनुसार किन्तु सत्य इससे भी परे है खैर हम ध्यान पर आते हैं |
निचे वर्णित ध्यान प्रयोग भाव प्रधान है और  बहुत हीं शक्तिशाली है बहुत  हीं शक्तिशाली कहने से डरने की आवश्यकता  नहीं है इस ध्यान प्रयोग से नुक्सान कुछ भी होने  वाला नहीं है और लाभ यह तो आप कर के हीं देखें और बताएं | इस ध्यान को करने से समस्त रोगों में लाभ मिलेगा , अपनी ऊर्जा परम पर होगी , आत्मविश्वाश में गजब का फायदा मिलेगा | दिव्य ऊर्जा की अनुभूति होगी |
 लम्बे अभ्यास के बाद कई सिद्धियाँ भी प्रकट हो सकती हैं , यथा |

यह ध्यान किसी भी समय किया जा सकता है किन्तु सूर्योदय के पूर्व या सूर्योदय के समय करने पर अत्यधिक लाभ मिल सकता है |
प्रथम चरण
आराम से सुखासन में बैठ जाएँ | निचे कोई ऊनी , सूती  का आसन बिछा लें | रीढ़ की हड्डी सीधी कर लें तनी हुई नहीं |
आँखें बंद कर लें | दो चार लम्बी गहरी सांस लें और छोड़ दें | आहिस्ता आहिस्ता आराम से |
ध्यान को आज्ञा  चक्र पर लायें  | तीन से पांच मिनट तक |
अब ध्यान को  सर के चोटी पर ले जाएँ तीन से पांच मिनट तक ध्यान को सर के चोटी पर टिकाये  रखें |
अब सूर्य का ध्यान करें प्रकाश से युक्त सूर्य आपके सर पर चमक रहा है और सूर्य की रश्मियाँ ( किरणें ) आपके सर पर गिर रहीं हैं ऐसा भाव करें |
पन्द्रह से बीस मिनट तक ऐसा भाव करें |
दूसरा चरण
ध्यान को आज्ञा चक्र पर लायें तीन से पांच मिनट तक |
उसके बाद
ध्यान को नाभि ( मणिपुर चक्र ) के पास ले आयें |  दो मिनट तक ध्यान को नाभि पर टिकाने के बाद
कल्पना करें आपके नाभि क्षेत्र में एक उगते हुए  लाल सूर्य को देखें | इस उगते हुए लाल सूर्य से प्रकाश की किरणें निकल कर आपके सारे शरीर में फ़ैल रही है ऐसी कल्पना करें |
पन्द्रह से बीस मिनट तक ऐसी  कल्पना करें 
पुनः ध्यान को आज्ञा चक्र पर लायें दो से पांच मिनट तक |
इसके बाद आप ध्यान से निकल सकते हैं  |
यह प्रकाश की किरणें आपके सारे रोगों को दूर करेगी | आपमें आत्मविश्वाश को  बढ़ाएगी , आपमें आनन्द का संचार करेगी | और भी अनेकों लाभ पहुंचाएगी |
ॐ ॐ ॐ






चेतना प्रसारण


पुरे ब्रह्मांड में अपनी सकारात्मक ऊर्जा फैलाएं यह आपके   हाथ में हैं | हिमालय के हिम गुफाओं में बैठे अनेकों सूक्ष्म शरीर में अवस्थित संत ये काम करते हैं | और आप भी ये काम कर सकते हैं | ऐसा करने से सकारात्मकता और नकारात्मकता में बैलेंस बना रहता है | अगर आप अपनी सकारात्मकता ब्रह्मांड में फैलायेंगे तो  इसका लाभ आपको भी मिलेगा औरों को तो लाभ मिलेगा हीं |

बहुत हीं आसान उपाय है ऐसा करने का |
आराम से बैठ जाएँ | सुखासन में | रीढ़ की हड्डी सीधी हो,  तनी हुई नहीं |
निचे कोई आसन बिछा लें ऊनी या सूती कुछ भी |
आँखें बंद कर लें |
दो चार लम्बी गहरी साँसें लें और छोड़ दें | आराम से आहिस्ता आहिस्ता जोर लगाकर  नहीं |
अपने ध्यान को आज्ञा चक्र ( दोनों भौं के बीच में ) पर टिका दें तीन से  पांच मिनट तक |
पांच मिनट बाद ,
अपने ध्यान को सर के चोटी पर अपना ध्यान ले जाएँ |
दो से तीन मिनट तक वहां ( सर के चोटी पर ) ध्यान टिकाने के बाद ,
कल्पना करें पुरे ब्रह्माण्ड का , अन्तरिक्ष का इसमें अपनी पृथ्वी का तस्वीर भी देखें |
कल्पना करें एक पवित्र श्वेत ( सफ़ेद ) ईश्वरीय  प्रकाश पुरे ब्रह्माण्ड में फ़ैल रहा है , जिससे अपनी पृथ्वी भी ढकी जा रही है |
बीस से तीस मिनट तक इस कल्पना में डूबे  रहें |
पुन: ध्यान को आज्ञा चक्र पर लायें | तीन से पांच मिनट तक अपना ध्यान आज्ञा चक्र पर रखें |
फिर , अपना  समय लेते हुए अपना ध्यान खोल सकते हैं |
ईश्वरीय श्वेत प्रकाश की कल्पना करने उसमे डूबने पर आप कई बार रोमांचित हो सकते हैं |
यह साधारण सा ध्यान प्रयोग आपके जीवन में क्रान्ति ला सकती है | कर के तो देखें |
ॐ ॐ ॐ